(अध्याय 7 )
ग्रेवी पिर गई!
सोचा था कि Saturday को दोपहर में एक चक्कर अर्चना के घर लगा लूँगी, उनको आज मूव करना था, ट्रक में लोडिंग हो रही होगी। लेकिन एक बहुत कॉम्प्लिकेटेड केस आ गया जिसमें फ़ौरन सी-सेक्शन करना पड़ा।आठवाँ महीना था, हमारे पास आते-आते मरीज़ की हालत एकदम बिगड़ चुकी थी, बेबी की तो premature death हो गई थी, माँ भी ख़तरे में थी, बॉडी में ज़हर काफ़ी फ़ैल गया था, किसी तरह से उसकी जान बचाई। मरीज़ के घरवाले बहुत insensitive थे, घर में बेचारी बहू स्लिप हो के गिर पड़ी सुबह सुबह, और किसी ने भी उसकी चीख़ नहीं सुनी, बेख़बर इत्मिनान से सोते रहे। जब आराम से सो कर उठे तब तक उसका शरीर नीला पड़ चुका था। यहाँ लाये तो बचाना मुश्किल था। ईश्वर की कृपा रही कि माँ की जान बच गई। अजन्मा बच्चा लड़का था जो ज़हर फैलने से एकदम नीला हो गया था, लड़के के मोह में पूरा परिवार दहाड़ें मार मार कर रोने लगा। पति को ये दुःख ज़्यादा था कि लड़का मर गया, लेकिन बीवी को टाइम पर हेल्प न करने का कोई मलाल नहीं। कमरे से लगे हुए बाथरूम में स्लिप होने के बाद बहुत चिल्लाई थी पेशेंट, लेकिन मजाल किसी के कानों में जूं भी रेंगी हो। सास अलग अपना रोना लिये बैठी थी कि बहू थोड़ा एहतियात करती तो पोता बच जाता। मुझे खीज होने लगी इन लोगों के रवैये से, शान्ति की तलाश में मैं अपने चेम्बर में बैठ गई। लेकिन अभी बैठी ही थी कि जनरल वार्ड से नर्स दौड़ी-दौड़ी आई कि देर रात में जिस लड़की की डिलीवरी हुई थी, उसकी हालत नाज़ुक़ हो गई है, काफी सारा ख़ून बह गया है और वो बेहोश हो गई है।
तुरन्त मैं ऑपरेशन थिएटर में चली गई। कल आधी रात में इस लड़की बबिता की डिलीवरी डॉ दिव्या ने कराई थी, रात की ड्यूटी उनकी थी। पहली डिलीवरी थी, ठीक ही था सब कुछ, सुबह नर्स ने जब वॉक के लिये उठने को कहा, तो वह बहुत कमज़ोरी महसूस कर रही थी । उसने कहा कि उठा नहीं जा रहा है तो नर्स थोड़ा व्यंग से हँसी। फिर "नख़रे बहुत हैं" बुदबुदाते हुए चली गई। बबिता की मम्मी ने बताया। फिर दोपहर में जब खाने के लिये उठाया गया तो वह बाथरूम जाने के लिये उठी और वहीँ फर्श पर गिर पड़ी और फैल गया हर तरफ़ ख़ून ही ख़ून। उसे इन्टर्नल ब्लीडिंग हो रही थी इसी वजह से कमज़ोरी इतनी थी। तुरन्त सर्जरी हुई और उसकी जान बच गई। डॉ दिव्या और नर्स दोनों की कोताही थी, बड़ी दया है भगवान की कि उसकी जान बच गई। मैं उस अदृश्य शक्ति, जिसे अनेकों नामों से पुकारते हैं, को बहुत मानती हूँ। मानव शरीर के बारे में यानि anatomy जब हम पढ़ रहे थे, तभी से उस मास्टर प्लानर के बारे में सोच के हैरत होती थी कि कितनी बारीक़ी से उसने ये रचना की है जिसमें हर अंग अपनी जगह पर पर्फेक्ट्ली फ़िट है!हमारा साइंस कितनी भी तरक़्क़ी कर ले, ऐसी रचना नहीं कर पायेगा!
नर्स को बुला के वॉर्निंग दी कि आगे से ऐसा अमानवीय रवैया मेरे यहाँ नहीं चलेगा।ये नई रिक्रूट थी शायद इसलिये हमारे इंस्टीटूयशन के हाई स्टैंडर्ड्स को नहीं समझ पाई। मरीज़ों के प्रति दया का भाव तो नर्सिंग की पहली ट्रेनिंग होती है, वही उसने भुला दिया। डॉ दिव्या की भी क्लास लेनी है, cesarean करने में ऐसी लापरवाही कैसे हुई उनसे? उन्हें तो लगभग एक साल होने वाले हैं यहाँ। मरीज़ की जान भी जा सकती थी। इन्हीं सब बातों में शाम हो गई, आज तो लंच भी स्किप हो गया। अब शाम के पेशेंट्स आने लगे हैं, उन्हें देखते देखते नौ बज जायेंगे और तब तक कमिश्नर साहब की फ़ैमिली यहाँ से जा चुकी होगी। इस अफ़रा तफ़री में ज़रा टाइम नहीं मिला अर्चना को फ़ोन तक करने का, पता नहीं क्यों आज ही ये सब होना था। ख़ैर, काम तो काम ही है, वर्क इज़ वरशिप.
घर पर सभी डिनर पर मेरा ही वेट कर रहे थे। मुझे बहुत थकान हो रही थी, खैर फ्रेश हो कर मैंने सबको जॉइन किया। मेरा उतरा और लम्बा चेहरा देख कर अमित और मम्मा ने पूछा कि सब ख़ैरियत तो है न, मैंने सिर हिला के हाँ में जवाब दिया। बोलने की जैसे एनर्जी ही नहीं बची थी। सभी लोगों के लिये नॉन वेज बना था, अवधी बिरयानी और शामी क़बाब। साथ में प्याज़ का रायता। मेरे लिये मेरा पसंदीदा मशरुम पुलाव पापड़ और रायते के साथ। शाही टुकड़ा मीठे में। खाना खा के थोड़ी जान में जान आई। साढ़े दस बजे रात में आर्यन से याहू पर वीडियो चैटिंग तय थी, टाइम पहले से सेट क्योँकि अक्सर वह वीकेंड में नहीं मिलता था। ख़ैर आजकल तो बहुत ठण्ड थी वहाँ , उतना घूमना तो नहीं हो रहा था फिर भी हम लोग टाइम फ़िक्स करके रखते थे।
खाना ख़तम करते ही साढ़े दस बज गये। हम लोग अमित के चेम्बर में आ गये चैटिंग के लिये, डेस्क टॉप वहीँ था। आज की शाम और संडे की सुबह अमित clients से नहीं मिलते हैं, ऑफ रखते हैं तो वहाँ प्राइवेसी थी। वेब कैम ऑन किया गया। तब के कम्प्यूटर्स में इन बिल्ट कैमरा नहीं होता था। वहाँ सुबह के नौ बज रहे होँगे। आर्यन सुबह उठ कर ही शावर लेके रेडी हो जाता है। आस्था के साथ वह दूसरी तरफ़ था। मेरा बेटा पोकेमॉन की टीशर्ट के ऊपर plaid ब्लैक एंड ग्रे ओपन बटन शर्ट में गज़ब का स्मार्ट और हैंडसम दिख रहा था। उसने उधर से सबको hay, how are you guys कहा। हमने लगभग एक साथ ग्रेट कह कर जवाब दिया। सबसे पहले मम्मा डैडी से उसकी बात हुई, फिर वो लोग सोने चले गये। फिर नवेली और आर्यन की ढेर सारी बातें जिसमें स्कूल, स्पोर्ट्स, कार्टून और फ़ास्ट फ़ूड अहम् थे। फिर अमित और मैं रह गये बात करने को। अमित भी इंग्लिश में ही बात करते थे। उधर से आर्यन की भी fluent अमेरिकन इंग्लिश। बाप बेटे का टॉपिक भी गज़ब!
"yes buddy, How the girls of your class pronounce your name ?"
"ओह डैड, दे काल मी एरी। आय आलरेडी टोल्ड देम टु काल मी बाय माय फ़ुल नेम बट दे डोन्ट लिसेन। "
"No worries dude, keep trying. How many girl friends you do have?"
"वॉट द। ......! आर यू किडिंग मी ! आय डोंट टाक ठु द गरल्स ! वी गायस प्ले सेपरेट।"
"OK . got You !" Now talk to Mom, she is staring me !And take care buddy , love you ."
मैंने मुस्कुरा के देखा। "कैसे हो बेटा ?"
"हां मैं टीक, हाउ यू हैव बीन मॉम?"
हम दोनों में ये तय हुआ था कि अपनी भाषा हिन्दी में बात किया करेंगें। क्योंकि इंग्लिश तो वहाँ हमेशा ही बोली जायेगी, हिन्दी वह भूल न जाये। आर्यन हिन्दी के कई अक्षर सही से नहीं बोल पाता है! हिन्दी बोली में कच्चा है, लेकिन कोशिश पूरी करता है।
"मैं अच्छी हूँ, तुम्हें बहुत मिस करती हूँ बेटा ! तुम्हारी छुट्टियाँ कैसी जा रही हैं?" Thanksgiving की क़रीब 5 दिनों की छुट्टियाँ चल रही हैं वहाँ पर इन दिनों।
"टीक जा रही। यू नो बुआ Turkey बनाये, उसपे मेरेकू ग्रेवी पोरने को बोले, सारी ग्रेवी फ़्लोर पे पिर गई। देन आई .. फ़्लोर वाइप किये। " मेरी हँसी रुकी ही नहीं इस बात पर! वह कुछ शरमा गया। असल में pour शब्द का हिन्दीकरण कर चुका था जो बहुत मनोरंजक था!
"मॉम, आज की कानी (कहानी) सुनाइए, राम जी की या बेबी कृष्ना की। "
मैंने उसे भगवान राम के अपने पिता की अनकही आज्ञा के परिणामस्वरूप वन जाने की कहानी सुनाई और हमारी बातें ख़तम होते-होते काफ़ी रात हो चली थी। जब मैं अपने रूम में आई तो अमित जाग रहे थे और कोई बुक पढ़ रहे थे। "माँ बेटे में ख़ूब देर तक बात हुई एज़ युशुअल। " hmm कहा मैंने और तुरन्त ही नींद ने अपनी आग़ोश में ले लिया!
क्रमशः .......
आरती श्रीवास्तव
Good .... intersting...gripping. waiting for next.
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