ये पँक्तियाँ मैंने 21. 9 . 2012 को लिखी थीं।
इक नूर है मेरे साथ में,
तेरा हाथ जबसे है हाथ में;
यूँ ही हाथ थामे चले चलो
जब तक चले ये ज़िन्दगी।
चाहे पास हो चाहे दूर हो,
बसे दिल में मेरे ज़रूर हो
कहीं जा बसों, कहीं भी रहो,
बसती यँहा बस्ती तेरी।
........ आरती
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